डायबिटीज से पैर के किस हिस्से में दर्द होता है?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 11:35

दर्द, झनझनाहट और पैरों का सुन्न होना- डायबिटिक न्यूरोपैथी एक तरह का नर्व डैमेज होता है जो डायबिटीज के मरीजों में होता है. मेयो क्लिनिक के मुताबिक, डायबिटिक न्यूरोपैथी के चलते टांगों और पैरों की नसें डैमेज हो जाती हैं जिसके चलते टांगों, पैर और हाथ में दर्द और सुन्न पड़ने जैसे लक्षण नजर आते हैं. जबकि कुछ में इसके लक्षण काफी दर्दनाक होते हैं.

पैर में अल्सर- आमतौर पर स्किन में दरार पड़ने या गहरा घाव बन जाने को अल्सर कहा जाता है. डायबिटिक फुट अल्सर एक खुला हुआ घाव होता है और डायबिटिज के 15 फीसदी मरीजों को इसका सामना करना पड़ता है. यह मुख्य रूप से पैर के तलवे में होता है. हल्के मामलों में, फुट अल्सर के कारण स्किन खराब हो जाती है लेकिन इसके गंभीर मामलों में शरीर के उस हिस्से को काटने तक की नौबत आ सकती है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचने के लिए शुरुआत से ही डायबिटीज के खतरे को कम करना काफी जरूरी है.

एथलीट फुट (पैरों में दाद)- डायबिटीज के कारण नसों के डैमेज होने से एथलीट फुट समेत कई दिक्कतें बढ़ सकती है. एथलीट फुट एक फंगल इंफेक्शन होता है जिसके कारण पैरों में खुजली, रेडनेस, और दरार पड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है. यह एक या दोनों पैरों को प्रभावित कर सकता है.

गांठ बनना या कॉर्न्स और कॉलस- डायबिटीज के चलते कॉर्न्स और कॉलस की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है. कॉर्न्स या कॉलस तब होता है जब किसी जगह की त्वचा पर काफी ज्यादा दबाव या रगड़ पड़ती है तो वह त्वचा सख्त और मोटी होने लगती है.

पैर के नाखूनो में फंगल इंफेक्शन- डायबिटीज के मरीजों में नाखूनों में होने वाले फंगल इंफेक्शन का खतरा भी काफी ज्यादा होता है. इसे ऑनिकोमाइकोसिस के नाम से जाना जाता ह जो आमतौर पर अंगूठे के नाखून को प्रभावित करता है. इस समस्या के चलते नाखूनों का रंग बदलने लगता है और वह काफी मोटे हो जाते हैं कुछ मामलों में नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं. कई बार नाखून में चोट लगने के कारण फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है.

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